न नारी स्वातंत्र्यमर्हति (नारी स्वतंत्र रहने योग्य नहीं है… )!!!

टूटी-फूटी इस सूक्तिवाक्य को पढ़ने के बाद मैं सन्न रह गयी। मनुस्मृति में एक ओर कहा गया कि ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ तो दूसरी ओर नारी को स्वतंत्रता के अयोग्य ही ठहरा दिया गया। आखिर ऐसा क्यों कहा गया ? बर्षों पहले दूरदर्शन पर एक विज्ञापन आता था जिसे... [पूरी पोस्ट]
writer रचना त्रिपाठी

मेरी माँ

views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[13 Feb 2010 08:30 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix