रंग और रिश्ते
आओ, मन को खुशी से भर दें,दिल के जज्बातों को रंग दें, फागुन की इस अलमस्ती में,बीते लम्हों संग भी चल लें।हम वक्त को कहते पाजी है, बेघर कर करता है यादों को,बचपन से साथ रहे जो अब तक ,रिश्ते- नातों के वादों को,इक अहसास रहे मन में, छूटे रिश्ते भी हैं अपने ,...
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Navnit Nirav
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[28 Feb 2010 14:12 PM]



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