कम हो रहे हैं नागा साधु

देख कबीरा दिन-दुनिया से कोई सरोकार नहीं, अपने में ही मदमस्त। देह पर भभूत लपेटे, बेतरतीब बढ़े बाल-नाखून, हाथों में त्रिशूल-ओ-कमण्डल। सामाजिक संस्कार ओ रीति-रिवाज से वास्ता नहीं। निर्वस्त्र, निर्गुण। स्वयं को आदिदेव महादेव के अनुचर बताने वाले - नागा साधु ही तो हैं।... [पूरी पोस्ट]
writer सुभाष चन्द्र

साधु

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[12 Feb 2010 04:17 AM]

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