उ का है गोरी...

देख कबीरा कभी-कभार ऐसा होता है कि मन नहीं लगता। अब नहीं लगता तो नहीं लगता। ऐसे में हम त दोइए काम करते हैं। एक कहीं घूमने भाग जाते नहि त इंटरनेट पर बैठिए। न कोनो चिक-चिक, झिक-झिक। कल अइसन ही हुआ। कुछेक दोस्तों के संग हंसी ठिठोली शुरू हो गई।अब, आप लोगन के त दिमाग... [पूरी पोस्ट]
writer सुभाष चन्द्र

सुभाष चन्द्र

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[24 Feb 2010 02:13 AM]

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