अनुभा का खत
अनुभा मकान के दूसरे तल्ले में अपनी सहेलियों से घिरी बैठी है। नीचे उसके विवाह की तैयारियां हो रही थीं पर वह इससे बेपरवाह खामोश बैठी सामने दीवार की ओर देख रही थी जिस पर बकरी को ले जाते हुए एक कसाई का चित्र उभर-उभर कर आता था।तब वह लगभग आठ साल की थी। एक बकरी...
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सुभाष चन्द्र
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[03 Mar 2010 23:15 PM]



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