आस्था से हारी मृत्यु, जीता आतंक

बेबाक टिप्पणी ऐसे दौर में जब बिना स्वार्थ कोई व्यक्ति अपने धर्म के बारे में सोचता तक नहीं। ऐसे दौर में जब स्वार्थ के लिए व्यक्ति धर्म परिवर्तन करने तक में नहीं हिचकता। ऐसे ही दौर में पाकिस्तान के पेशावर में जसपाल सिंह और महाल सिंह ने अपना सिर कलम करवा लिया, मगर धर्म... [पूरी पोस्ट]
writer रविकांत प्रसाद
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[24 Feb 2010 02:13 AM]

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