ये कैसी पत्रकारिता
पत्रकार रहते पत्रकारिता पर लिखना काफी मुसीबत भरा काम है। ये ठीक वैसा ही है जैसे तालाब में रहकर मगरमच्छ को चुटकी काट लेना। फिर भी आज मन नहीं मान रहा। लखनऊ के हमारे एक पत्रकार बंधू हैं जिनसे जुडी घटना का ज़िक्र अपने ब्लॉग पर ना कर पाऊं तो आत्मग्लानी मुझे...
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जैगम मुर्तजा
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[12 Feb 2010 02:30 AM]



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