एक स्तब्ध पेड़

गुलमोहर का फूल दीदी “समता” की एक रचना-   पतझड़ सी भंगिमा लिये एक स्तब्ध पेड़ । उसकी निस्तब्धता विच्छिन्न क्यों ? शायद देखता है, अपने साथियों को, सावन आने की खुशी में, खिलते हुऐ , हरियाली दिखाते हुऐ । मगर वह क्यों वंचित है, इन खुशियों से ? प्रकृति नहीं जानता, भेद भाव... [पूरी पोस्ट]
writer चंदन कुमार झा

ज़िन्दगी

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[07 Mar 2010 15:30 PM]

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