आप
मन दर्पण है घर अगन मन का सच्चा प्रतीविम्ब हो आपसपना देखू हर पल में तो उन सपनो का साथ हो आप मन में अति भावनाओ है उन भावो का सर हो आप जिसे छुपाये फिरती सब से ऐसा हसी राज़ हो आप भाव विचरते है इस मन में उनकी की अभिव्यक्ति हो आप पल्को में तस्वीर सजी है अपलक...
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gargi gupta
कविता
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[02 Mar 2010 00:04 AM]



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