न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह
न हमारी आग का रंग बदलेगा – महेन्द्र नेह
( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata)
शब्दों के कुछ समूह हमारी चेतना पर अचानक एक हथौडे़ की तरह पड़ते हैं, और हमें बुरी तरहझिंझोड़ डालते हैं. दरअसल हथौडे़ की तरह पड़ने और बुरी तरह झिंझोड़ डालने वाली...
[पूरी पोस्ट]
रवि कुमार, रावतभाटा
आगकविता-पोस्टरमहेन्द्र नेहज़मीन
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[20 Feb 2010 10:15 AM]



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