रंग – कविता – रवि कुमार
रंग
(a poem by ravi kumar, rawatabhata) रंग बहुत महत्वपूर्ण होते हैं
इसलिए भी कि
हम उनमें ज़्यादा फ़र्क कर पाते हैं
कहते हैं पशुओं को
रंग महसूस नहीं हो पाते
गोया रंगों से सरोबार होना
शायद ज़्यादा आदमी होना है
यह समझ
गहरे से पैबस्त है दिमाग़ों में
तभी तो यह...
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रवि कुमार, रावतभाटा
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[28 Feb 2010 12:31 PM]



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