अतीत की यादें
वक्त की आँधी चली यादों के पन्ने फर्फराएमन में चुभन सी है नयी .. लो आज फिर तुम याद आये वो हँसते पल वो रोते पल पल पल में सपने संजोते पल फिर आज मन को छू गए मृत प्रेम के वो मौन साये कुछ कड़वे से कुछ मीठे से और कुछ निगोड़े सीठे से झगडों का खेल निराला था...
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Paridhi Jha
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[13 Feb 2010 12:29 PM]



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