न सोचा था कभी
न सोचा था कभी दे जाएगा ऐसी सज़ा कोई कभी कह जाएगा यारों मुझे भी बेवफा कोई तुम्हारे प्रेम के दो घूँट मैंने पी लिए जब से मुझे चढ़ता नहीं है दूसरा अब तो नशा कोई गिले सब दूर शिकवे भी शिकायत भी नहीं रहती दिलों के दरमियान रहता नहीं जब फासला कोई...
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jogeshwar garg
ghazal
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[14 Feb 2010 08:25 AM]



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