ईंट पत्थर ढूँढता है

Jogeshwar Garg ईंट पत्थर ढूँढता है फिर मेरा सर ढूँढता है एक कुनबा मुश्किलों का क्यों मेरा घर ढूँढता है हाथ में कैंची लिए वो फैलते पर ढूंढता है राम भी हनुमान जैसे और वानर ढूँढता है भक्त भूले देवता को और तस्कर ढूँढता है मरहमों से तंग आकर ज़ख्म खंज़र ढूँढता है प्यार की दो... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

ghazal

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[16 Feb 2010 13:07 PM]

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