होली में

Jogeshwar Garg करे हैं रंग का बू का सभी व्यापार होली में मुहब्बत कम से कमतर हो रही हर बार होली में न थापें चंग पर ना गालियाँ ना गीत अब बाकी कभी गलियाँ मुहल्ले थे बहुत गुलजार होली में  हमारे जिस्म की मज़बूतियाँ बेकार हैं यारों हमारी सोच ही जब हो... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

ghazal

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[01 Mar 2010 12:01 PM]

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