होली में
करे हैं रंग का बू का सभी व्यापार होली में मुहब्बत कम से कमतर हो रही हर बार होली में न थापें चंग पर ना गालियाँ ना गीत अब बाकी कभी गलियाँ मुहल्ले थे बहुत गुलजार होली में हमारे जिस्म की मज़बूतियाँ बेकार हैं यारों हमारी सोच ही जब हो...
[पूरी पोस्ट]
jogeshwar garg
ghazal
9
0
0
0
0
[01 Mar 2010 12:01 PM]



Shuffle








