ऐसी होती है नारी ---
आज महिला दिवस के अवसर पर , एक छोटी सी रचना , नारी के विभिन्न रूपों को समर्पित :मात पिता को पुत्रीबेटा बन कर संभालतीसेवाभाव में न हारी ,ऐसी होती है नारी।कौर बांटे भाई सेत्याग की बने मूर्तीरहे फ़र्ज़ पर बलिहारी ,ऐसी होती है नारी।पति प्रेम में प्रेयसीसमर्पण...
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डॉ टी एस दराल
महिला दिवस
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[08 Mar 2010 05:40 AM]



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