मुझको नशे से ज्यादा नशा,

gazal k bahane यूं तो वो हमेशा ही दिल के पास में रहापर,उसका जल्वा मुस्तकिल कयास में रहाउसको ही ढूंढते रहे,कैसे थे बेखबरहर वक्त ही जो अपने आस-पास में रहाखुशबू बसी हुई है जिस तरह से फूल में ऐसे ही कुछ वो मेरी सांस-सांस में रहावो जिन्दगी से दूर, बहुत दूर जा बसेता-उम्र... [पूरी पोस्ट]
writer श्याम सखा 'श्याम'

gazal

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[16 Feb 2010 08:56 AM]

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