जिसको भी मारा अपनो ने मारा है-gazal

gazal k bahane १२१खारा है सागर सचमुच खारा है नदिया ने फ़िर भी सब कुछ वारा हैसातों के सातों सुर हैं उसकी मुठ्ठी मेंकहने को वो बेचारा इक तारा हैजीत सदा सच की होती कहने भर कोसच बेचारा द्वापर में भी हारा हैबेशक यह  सुन्दर और गठीली भी हैदेह मगर कहते सांसो की कारा... [पूरी पोस्ट]
writer श्याम सखा 'श्याम'
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[19 Feb 2010 08:04 AM]

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