सच बोलना आदत रही कब है मेरी
माना तेरे हाथों में कोई पत्थर न था पर क्या तेरी हर बात में नश्तर न थासच बोलना आदत रही कब है मेरीपर झूठ कहने का वहां अवसर न थाबीवी मेरी बच्चे मेरे मैं भी तो था था तो मकां भी मेरा लेकिन घर न थाजलथल हुआ था शहर मेरे दोस्तोबादल...
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श्याम सखा 'श्याम'
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[03 Mar 2010 00:19 AM]



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