gazal k bahane
मुझको झूठ कभी रास नहीं आया सुनकर सच कोई पास नहीं आयासमझे कौन भला अब दुख हाकिम का हुक्म बजाने को दास नहीं आया भूखे पेट सदा सोये हम यारो करना लेकिन उपवास नहीं आया पाँव ...
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श्याम सखा 'श्याम'
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[07 Mar 2010 23:09 PM]



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