मुरली तेरा मुरलीधर 44

अखिलं मधुरम् गाने आया जो अनगाया गीत अभी तक वह मधुकरवीण खोलते कसते ही सब बासर बीत गये निर्झरसही समय आया न सज सके उचित शब्दसंभार कभीटेर रहा समयानुकूलिनी मुरली तेरा मुरलीधर।२३६।मारुत रोता रहा खिले पर गहगह फूल नहीं मधुकरइच्छाओं की पीडा का ही था उरभार गहन निर्झरगृह... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu

murali tera muralidhar

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[18 Feb 2010 20:31 PM]

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