मुरली तेरा मुरलीधर 45
निज प्रियतम के विशद विश्व में और न कुछ करना मधुकरनिरुद्देश्य उसके गीतों को झंकृत कर देना निर्झरपंकिल भर देना निज कोना बहा गीतधारा प्रभुमयटेर रहा अर्चनोद्वेलिता मुरली तेरा मुरलीधर।२४१।जग उत्सव मे प्राणनाथ का मिला निमन्त्रण है मधुकरआशीर्वादित हुये प्राण...
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हिमांशु । Himanshu
murali tera muralidhar
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[18 Feb 2010 20:31 PM]



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