आज महिला दिवस है

हिमाल : अपना-पहाड़ मां कोजिसने मेरे लिएसहे न जाने कितने दर्द बहन कोजिसने बिना किसी शर्तमेरी सारी बात मानीऔर उन सबको जो बिन चाहे मिलेएक सपना भर गए मेरी अधजगी आंखो मेंदिल में धड़कनें जगाईऔर मेरी थमी थमी राहों को दे गए रफ्तारवो जो बहुत करीब आए बिन चाहेऔर बादल की तरह बरस कर... [पूरी पोस्ट]
writer जितेंद्र भट्ट

मेरी कविता

views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[07 Mar 2010 13:44 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix