कैसे सरेआम कर दूं तेरे कांधे के बोसे को
हैं कई इल्जाम मुझ पर यूँ तो चुप रहने को कैसे सरेआम कर दूं तेरे कांधे के बोसे कोकुछ तो बरकत मिली होगी भूखे पेट सोने से वैसे तो मोमिन कहता है,...
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Sudhir (सुधीर)
ग़ज़ल
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[16 Feb 2010 19:46 PM]



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