बिना हारे अब कदम बढ़ाइए
जाता है कि जब किसी की नियत में खोट हो तो उससे सही काम करने की उम्मीद करना खुद को धोखा देने के समान होता है। ऐसी स्थिति आज भारतीय लोकतंत्र के नौकरशाही तबके में भी घर कर चुका है। नौकरशाहों की नियत आम जनता और देश के प्रति कैसी है, यह समय-समय पर दिखता रहा...
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EDHAR HAI
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[15 Feb 2010 02:31 AM]



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