राष्ट्रपति की चिंता और उधर सांसदों की जम्हाई

EDHAR HAI यूं तो हमारे देश के लोकतंत्र का मंदिर शब्द से नवाजा जाने वाला संसद पर इतने दाग लग चुके हैं कि उसे वर्तमान हालात में धोना आसान दिखाई नहीं देता। इसके बाद भी इस मंदिर में बैठने वाले जो भी फैसला लेते हैं उसे देश की जनता कभी लाठी खाकर तो कभी आंसू के गोले के... [पूरी पोस्ट]
writer EDHAR HAI
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[23 Feb 2010 03:38 AM]

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