चक्रव्यूह
विरह दंश सेपीड़ित धड़कनतेरे नाम से हीधड़क जाती हैसोच ज़राक्या होगाउस पल जबयुगों के चक्रव्यूहमें फँसीजन्म -जन्मान्तरोंसे भटकती रूहोंका मिलन होगाऔर दीदार कोतरसते नैनचार होंगेजब प्रेम अपनेचरम पर होगा उस चिर प्रतीक्षितक्षणिक पल मेंधड़कन रूक नही जाएगीसाँस थम...
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वन्दना
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[11 Feb 2010 05:33 AM]



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