प्रेम की परिधि

zindagi मुझेरेखांकित कियाजब तुमनेअपने प्रेम कीपरिधि मेंबाँधा जब तुमनेअपने मूक प्रेमकी डोर से तुमनेमेरे भटकतेअर्धव्यास कोस्वयं के व्यास सेजोड़कर संपूर्णघेरा बना लियाजब तुमनेतब उसी परिधि मेंअपनी धुरी परघूमते- घूमतेकब मैंतेरा ही रूप हो गयीपता ही ना चलाआओ अब इसपरिधि... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[14 Feb 2010 10:15 AM]

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