तेरी ख़ामोशी
तेरी ख़ामोशीजब बातें करती है मुझसेबस वहीं धडकनेंरूक जाती हैंजो तुझसे नहीं कह पातींवो अफसानेमेरे कानो मेंबयां कर जाती हैंकभी तेरातितलियों सा उड़नाकभी तूफ़ान सा मचलनाकभी खग सदृशआकाश में उड़नाकभी यादों केकटहरे मेंसजायाफ्ता मुजरिम साखामोश ठहर जानाकभी मेघों सा...
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वन्दना
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[04 Mar 2010 07:48 AM]



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