दयानंद जी ने क्या खोजा क्या पाया (भाग २)
वैसे तो यह गुमनाम पुस्तक समीक्षा के काबिल भी नहीं है किन्तु ऐसी कुतर्कों भरी अनेक पुस्तकें नेट पर प्रचारित की जा रहीं है इसीलिए एक का खंडन करने से आप समझ सकते हैं बाकी सब भी इसी तरह की बकवास से भरी पढ़ी हैं। मैं इस पुस्तक के मुख्य वक्तव्य नंबरवाइज लिख कर...
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सौरभ आत्रेय
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[19 Feb 2010 09:36 AM]



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