सत्य का निर्धारण कैसे हो (न्यायदर्शनम् भाग १)

सत्यार्थ-प्रकाश ऐसा लगता है इन्टरनेट पर भी कोई भी व्यक्ति कुछ भी कहने के लिए स्वतंत्र है चाहे वो सत्य हो या असत्य, तार्किक हो या अतार्किक। इस बात से बहुत से पाठक धुर्त और मुर्ख लोगो के असत्य के जाल में फंस जाते हैं जिस से सत्य की हानि होती है। नैट पर लोगो द्वारा छलना और... [पूरी पोस्ट]
writer सौरभ आत्रेय
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[06 Mar 2010 05:39 AM]

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