क्या हीन भावना से ग्रसित हैँ हिँदुस्तानी?
मुझे ये बात आज तक समझ नहीँ आई कि हम हिँदुस्तानी आपस मेँ बात करने के लिये विदेशी भाषा का सहारा क्योँ लेते हैँ? क्या हम अपनी भाषा और अपनी पहचान को लेकर किसी हीन भावना से ग्रसित हैँ? अज़ादी के साठ साल बाद भी हम अपने शिक्षण मेँ हिँदी को सम्मिलित नहीँ कर पाये...
[पूरी पोस्ट]
Yogesh Gulati
6
0
0
0
0
[18 Feb 2010 13:20 PM]



Shuffle








