गुलामी की मानसिकता से कब उबरेँगे हिँदुस्तानी?
अपनी पिछली पोस्ट मेँ मैँने एक सीधा सा सवाल पूछा था कि आखिर हम हिँदुस्तानी आपस मेँ हिँदी मेँ बात करने मेँ हिचकते क्योँ हैँ? जबकि अँग्रेज़ी मेँ बात करने मेँ हम गौरव का अनुभव करते हैँ! ये सवाल मैँने इसलिये पूछा था क्योँकि इन दिनोँ अँग्रेज़ी का प्रचलन बढता ही...
[पूरी पोस्ट]
Yogesh Gulati
11
0
0
0
0
[23 Feb 2010 17:29 PM]



Shuffle








