क्या यही भारत का लोकतंत्र है
कुछ गरीब बच्चौं को मीठे की दूकान प़रझूठे दौने चाटते देखकर करकुछ खाकर दौने फैंकने वाले कहते हैंये दौनों में अपनी किस्मत ढूंड रहे हैं ,वास्तव में वास्तविकता ये हैआजादी के ६० वर्ष बाद भीभारत जैसे लोकतंत्र में बच्चे गरीबी की तस्वीर देख रहे हैं ,कुछ विदेशी उन...
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K.P.Chauhan
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[27 Feb 2010 16:08 PM]



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