बजट का बाजा
जब , पास की दुकान से चने -चिढ्वा लेने जाती थी , तब , पच्चीस पैसे से लेकर पचास पैसे तक हर बच्चा अपनी ख्वाहिश पूरी कर पाता था . वह समय कुछ और था , उस समय विज्ञानं उतना विकसित नहीं हुआ था . गाँव के लोगों का शहरी लोगों से रिश्ता यदा -कदा ही हो पाता था . यह ,...
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Renu Sharma
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[17 Feb 2010 06:33 AM]



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