लो , बीत गया , दहशत का साल
हर बार नव वर्ष आता है , दुनियां भर के मानव खुशियाँ मनाते हैं . नए साल के डूबते सूरज का सम्मान कराते हुए , उगते हुए भास्कर का अभिनन्दन अपने -अपने तरीके से सभी कर लेते हैं . बीते बरस की गई गलतियों से शायद तौबा भी करते हैं , भविष्य की सुनहरी योजनाओं की...
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Renu Sharma
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[05 Mar 2010 08:37 AM]



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