होली पर ब्लोगर्स की झान्की
बुरा ना मानो होली हैहोली पर नजीर अकबरावदी जी की इस गज़ल से अधिक सार्थक मुझे कुछ भी नही नज़र आता. इसलिये आज की बात यही से शुरु कर रहा हू. बहुत बार ऐसा होता है कि हम होली पर अपने चिर परिचित परिवेश से दूर होते है तब नज़ीर जी के बनाये हुए इन शब्द चित्रो से...
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HARI SHARMA
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[02 Mar 2010 14:28 PM]



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