सआदत हसन मंटो की लघुकथाएं
कम्युनिज्मवह अपने घर का तमाम जरूरी सामान एक ट्रक में लदवाकर दूसरे शहर जा रहा था कि रास्ते में लोगों ने उसे रोक लिया । एक ने ट्रक के सामान पर नजर डालते हुए कहा, ‘‘देखो यार, किस मजे से इतना माल अकेला उड़ाये चला जा रहा है।’’ समान के मालिक ने कहा, ‘‘जनाब माल...
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अरविन्द श्रीवास्तव
मंटो
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[04 Mar 2010 07:26 AM]



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