आज ‘हिन्दुस्तान’ दैनिक (रविवार रीमिक्स) में प्रकाशित अपनी तीन कविताएँ ब्लॉगर मित्रों के लिएः-
विरासतअर्सा गुजर गयाजमींदोज हो गये जमींदार साहबबहरहाल सब्जी बेच रही है साहब की एक माशूकाउसके हिस्से स्मृतियों को छोड. कोई दूसरा दस्तावेज नहीं है ...
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अरविन्द श्रीवास्तव
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[07 Mar 2010 03:35 AM]



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