आजकल ज़िन्दगी
आमिर खुसरो की एक सूफी कविता की कुछ पंक्तियाँ -आज बसंत मनाले सुहागन, आज बसंत मनालेअंजन मंजन कर पिया मोरी, लम्बे नेहर लगालेतू क्या सोवे नींद की मासी, बंद जागे तेरे भाग सुहागन, आज बसंत मनालेऊंची नार के ऊंचे चितवन, अयसो दियो है बनाएशाह आमिर तुही देखन को,...
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Richa
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[20 Feb 2010 00:18 AM]



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