स्वांग
सोहन मुंह ढक के सोया था. सोहन की आमा (दादी) ने सग्गड़ (अंगीठी) में हाथ तताते (गर्म करते) हुए उसकी माँ, परुली से कहा भी था..."उठा रे इसको.ब्याल (शाम) पड़ी भी कोई सोने वाला हुआ भला?और इस सग्गड़ में २ घुटरूल (कोयले और गोबर के उपले) और डाल दे और आचमन का पानी...
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दर्पण साह 'दर्शन'
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[25 Feb 2010 08:54 AM]



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