अलविदा प्रिये

प्राची व उसके पार... आज मैं,'तुमको'और 'तुम्हारे लिए' भीअंतिम कविता (सा कुछ) लिख रहा हूँ,आज मैं स्वीकार करना चाहता हूँ,खुद से,और तुमसे भी.......तुमसे इसलिए कि तुम मेरा एक मात्र निजी सरोकार हो....कि मैं स्व आहुति दे दूंगा.हो सकता है मैं पागल घोषित कर दिया जाऊं.या इससे भी... [पूरी पोस्ट]
writer दर्पण साह 'दर्शन'

darpan sah

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[25 Feb 2010 08:53 AM]

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