दो कविताएँ

प्राची व उसके पार... कवि की अंतिम इच्छा (पाश को...)निकास की देहरी पर बैठी,रात का,अलसाई सुबह की प्रथम प्रहर से,'आलिंगन'...निषिद्ध हो !ये,प्रेमाभिव्यक्ति का समय...कतई नहीं है .ये समय बिलकुल ठीक है... दिलों में उठते कारखानी - धुओं को,बुझाने वालों,या...उसे फूंक फूंक कर,आँखें... [पूरी पोस्ट]
writer दर्पण साह 'दर्शन'
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[22 Feb 2010 09:26 AM]

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