एवें ही
बेतखल्लुस अब भी क्यूँ बैठा है तू इस बज़्म में,जिसमें हर तदबीर तेरी नातवां सी हो गयी.कोई घर कितना सौभाग्यशाली हो सकता है?अच्छी बात है पुस्तक मेले दिल्ली में होते हैं और संयोग ये कि मैं भी दिल्ली में रहता हूँ, तिस पर बेचुलर हूँ .मनु जी, गौतम दाज्यू, मुफलिस...
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दर्पण साह 'दर्शन'
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[05 Mar 2010 00:34 AM]



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