ओंस जब बन बूंद ...............
ऑस जब बन बूँद बहती, पात का कम्पन ह्रदय मे छा रहा है नीर का देखा रुदन किसने यहां पे ,पीर वो भी संग ले के जा रहा हैलोग जो हैं अब तलक मुझसे मिले ,शब्द से रिश्तो में अंतर आ रहा हैअर्थ अपने जिन्दगी का ढूँढ़ने में, व्यर्थ ही जीवन यहाँ पे जा रहा हैइन उनीदी आँख...
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vikram7
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[04 Mar 2010 08:17 AM]



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