कस्बाई कवि सम्मेलन वाया फ्लैशबैक
पहले क्या कवि होते थे, क्या कविताएं होती थीं, क्या कवि सम्मेलन होते थे, कसम से। वाह...!, वाह...! ,तय करना मुश्किल होता था कि ऐसा सुनाने वालों के पहले दांत तोड़ें कि ऐसा नामुराद लिखने वालों के हाथ कि आयोजकों को ही लंगड़ा बना दें। हालांकि तीनों में से यादा...
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अनुज
vyangya
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[07 Mar 2010 03:08 AM]



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