मान्या की दादी का एक बालगीत : पीछे-पीछे सब डिब्बों से

सरस पायस गिरिजा कुलश्रेष्ठ पीछे-पीछे सब डिब्बों सेनन्ही मान्या घुटनों-घुटनोंचलती किलक-किलककर!उसे पकड़ने दौड़ पड़ा हैपीछे-पीछे सब घर! चश्मा रखकर दौड़ीं दादी,पुस्तक रखकर दादा,हड़बड़-गड़बड़ पापा-मम्मी,काम छोड़कर आधा,चकराए चाचा चिल्लाए --रोको, अरे, सँभलकर!नन्ही... [पूरी पोस्ट]
writer रावेंद्रकुमार रवि

बालगीत

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[15 Feb 2010 09:04 AM]

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