हो... हो... होली है : अरविंद राज का एक बालगीत
हो... हो... होली है ! मन में तरंग है, तन में उमंग है । धरती रंगीली है, अंबर सतरंग है । रंगों में रँगी हुई मस्तों की टोली है । होली है... हो... हो... होली है !आज नहीं दिल में है कोई मलाल । छेड़ रहे सब मिलकर खुशियों की ताल । रंगों में आज भली प्रेम-भंग घोली...
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रावेंद्रकुमार रवि
बालगीत
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[25 Feb 2010 12:47 PM]



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