अपने ही गर्भ में छिपा लो…सिखा दो…अभेद्य मंत्र

चौराहा अनजाने चेहरों वाली / सीमाओं से पार / भाषाओं से इतर / कई तस्वीरें / देखीं / सुनीं / पहली-पहली बार / तुम्हारे ही संग / उनमें बसा प्रेम / उभरा तब तुम्हारी आंख से / छलका हमारे होंठों तक / आज फिर / गया उसी दौर में / पर अबूझ रह गए / वो चित्र / जड़ हैं नायक /... [पूरी पोस्ट]
writer चण्डीदत्त शुक्ल

कह रहा हूं तुमसे

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[11 Feb 2010 10:53 AM]

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