तुम्हारी मर्ज़ी

feminist poems किसने कहा थाखोल दो खिड़कियाँ?अब बौछारें पड़ेंगीतो उनकी छींटेंभिगो देंगी घर के कोने,हवाएँ आयेंगींऔर फड़फड़ायेंगेडायरी के पन्ने,कुछ तिनके, कुछ धूल,कुछ सूखे पत्ते,डाल से टूटकर आ जायेंगेहवाओं के साथ अनचाहे ही,ताज़ी हवा और रोशनी के लियेये सब तोसहना ही... [पूरी पोस्ट]
writer mukti

हवा

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[11 Feb 2010 14:58 PM]

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